
2 घंटे विलम्ब से हनुमंत कथा प्रारम्भ होने पर आचार्य शास्त्री ने सर्वप्रथम क्षमा मांगी. उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ की पवन धरा भगवान राम की ननिहाल होने की वजह से हम छत्तीसगढ़ के भांजा हुवे..
उन्होंने कीर्तन गाने के लिए कहा जो जोर जोर से कीर्तन गाते हैं उनके सब पाप धूल जाते हैं..
सुन्दर कांड की व्याख्या करते हुवे शास्त्री जी ने कहा.. जिसमे भक्ति का भक्ति का मिलन होता है उसी का नाम ही सुंदसर कांड है..
हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुवे कहा जो दूत बनकर जाएँ और पूत बनकर आएं उसी का नाम सुंदर कांड कहते हैं..
बंदर भी सुंदर् हो सकता है जो राम जी काम करता हो.. और सुंदर भी बंदर हो सकता है जो रावण का काम करें.
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