
आज से होलाष्टक प्रारंभ आज से ठाकूरजी राजाधिराज द्वारकाधीश को धूलेटी तक स्वेत वस्त्र धारण कराये जायेंगे एवम् अबील गूलाल की पोटली दोनो तरफ कमर मे बांधी जायेंगी ओर सूबह शृंगार आरती ओर साम को संध्या आरती मे दर्शन करने वाले सभी भक्तो ठाकूरजी के प्रसाद के रूप मे गूलाल से रंगा जायेगा
होली से पहले आठ दिन यह अवधि में फागुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर होलिका दहन पूर्णिमा तक रहती है इस दौरान ज्योतिष रूप से अशुभ ग्रहों की उग्रता के कारण सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित होते हैं 8 दिनों में दान पुण्य करना बहुत उत्तम माना जाता है
इन दिनों में होलिका दहन के लिए डंडे गांव में होलिका स्थापित किए जाते हैं और होलिका दहन के बाद ही या अवधि समाप्त होती है