कोरबाछत्तीसगढ़

जानिए कौन है माडवी हिड़मा

“150 से अधिक जवानों का हत्यारा था माडवी हिड़मा बता दें कि 3 अप्रैल 2021 को सुरक्षाबल पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की बटालियन नंबर-1 के कमांडर माडवी हिड़मा को पकड़ने निकले थे, लेकिन मौके पर नक्सलियों ने जवानों पर हमला बोल दिया और इस मुठभेड़ में 22 जवानों की मौत हो गई थी।

वहीं अप्रैल 2017 के बुर्कापाल हमले में सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हो गए थे। दंतेवाड़ा हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में भी हिड़मा ने नेतृत्व किया था। इस गांव में हुआ था हिड़मा का जन्म हिड़मा का जन्म दक्षिण सुकमा के पुवार्ती गांव में हुआ था और वो बीजापुर में एक स्थानीय जनजाति से संबंध रखता था। वो माओवादियों की पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) बटालियन-1 का हेड था। इसके अलावा माओवादी स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) का भी सदस्य था। इतनी ही नहीं सीपीआई की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी का सदस्य था।

हिडमा का अपराधी इतिहास: दहशत का पर्याय माडवी हिडमा, जिसे उसके साथी ‘संतोष’ भी कहते थे, नक्सलवाद का सबसे खतरनाक चेहरा था। 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवारथी इलाके में जन्मे हिडमा ने 2000 के दशक में माओवादी संगठन में शामिल होकर पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर 1 का कमांडर बन गया। वह सीपीआई (माओइस्ट) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था और बस्तर क्षेत्र का इकलौता आदिवासी प्रतिनिधि। उसके नेतृत्व में बस्तर में 26 से अधिक बड़े हमले हुए, जिनमें सैकड़ों जवान और नागरिक मारे गए। कुछ प्रमुख हमलों में उसकी भूमिका: • 2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए। • 2013 झीरम घाटी (दरबा वैली) नरसंहार: 27 लोग मारे गए, जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेता महेंद्र कर्मा, विद्या चरण शुक्ला और नंद कुमार पटेल शामिल थे। • 2017 सुकमा हमला: कई जवान शहीद। • 2021 सुकमा-बीजापुर हमला: 22 सुरक्षा कर्मी मारे गए। हिडमा के कारण बस्तर में ‘लाल आतंक’ का राज था। हाल ही में उसकी मां ने सार्वजनिक अपील की थी कि वह हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया। केंद्र सरकार ने उसके सिर पर 50 लाख, जबकि राज्य सरकार ने 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

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