कोरबाछत्तीसगढ़

जंगल में दिखा विदेशी परिंदा ‘जंगली टर्की’अनोखा पक्षी

  • बना ग्राम का आकर्षण
    कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिले के ग्राम मूडूमाटी में इन दिनों एक अनोखे परिंदे की चर्चा जोरों पर है। सामान्य मुर्गियों से आकार में कहीं ज्यादा बड़ा और बेहद आकर्षक दिखने वाला यह पक्षी न सिर्फ गांववालों, बल्कि आस-पास के इलाकों के लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बन गया है।
    जानकारी के अनुसार यह अनोखा पक्षी है ‘जंगली टर्की’ जिसका वैज्ञानिक नाम ‘मेलिएग्रिस गैलोपावो (Meleagris gallopavo)’ है। यह मूल रूप से उत्तरी अमेरिका का निवासी पक्षी है, जिसे पहली बार ग्राम मूडूमाटी में देखा गया।

  • ग्राम के ग्रामीण जो पहाड़ी कोरवा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, ने बताया कि उन्होंने कुछ माह पहले इस अनोखे पक्षी की दो जोड़ी खरीदी थी। उनके आकर्षक रंग, बड़े आकार और राजसी चाल देखकर ही वे इन्हें पालने का मन बना बैठे। आज ये पक्षी उनके परिवार का हिस्सा बन चुके हैं, बच्चे उन्हें नाम से बुलाते हैं और गांव के लोग रोज़ाना इन्हें देखने पहुंचते हैं।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि “जंगली टर्की” जमीन पर रहने वाला पक्षी है और यह सामान्य मुर्गियों की तुलना में आकार में लगभग तीन गुना बड़ा होता है। नर टर्की का वजन 10 से 12 किलो तक पहुंच सकता है, जबकि इसके पंखों का फैलाव डेढ़ मीटर तक होता है। इसके सिर पर मौजूद चमकीले मांसल उभार और पंखों का आकर्षक रंग इसे अन्य पक्षियों से अलग पहचान देते हैं।

  • जानकार बताते हैं कि यह वही प्रजाति है जिसे विदेशों में थैंक्सगिविंग डे जैसे त्यौहारों में पारंपरिक भोजन के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि, ग्राम मूडूमाटी में यह पक्षी अब जिज्ञासा और सौंदर्य का प्रतीक बन गया है।
    ग्रामीण नारायण सिंह कहते हैं की “लोग दूर-दूर से इसे देखने आते हैं। बच्चे तो इसे ‘बड़ा मुर्गा’ कहकर पुकारते हैं। इसकी चाल, आवाज और अंदाज़ सभी को अचरज में डाल देते हैं।” स्थानीय वन विभाग भी इस अनोखी खोज में रुचि ले रहा है और पक्षी की प्रजाति की पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजने की बात कही है। गांव के लोगों का कहना है कि यह ‘टर्की’ अब ग्राम मूडूमाटी की पहचान बन चुका है हर आने-जाने वाला इसे एक बार ज़रूर देखना चाहता है।

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