कोरबाछत्तीसगढ़

अनुकम्पा नौकरी पाने बहू बनी बेटी,शिकायत और जानकारी होने पर भी कार्यवाही नहीं, अधिकारियों का खुला संरक्षण?

कोरबा /छत्तीसगढ़

सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार हैं चाहे फर्जी डिग्री और दस्तावेज बनाने की बात हो या बनवाने की इससे गुरेज़ नहीं करते हैं! हाईकोर्ट बिलासपुर ने दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे लगे सभी कर्मचारियों को भौतिक सत्यापन करवाने का आदेश जारी किया गया है जिससे फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है याचिकाकर्ता का आरोप है की प्रदेश में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर लोग कई विभागों में नौकरी कर रहे हैं!

कोरबा जिला के शिक्षा विभाग से एक चौकाने वाली खबर अनुकम्पा नौकरी को लेकर सामने आई है जिसमें बहू अपने सास के मृत्यु के बाद मिलने वाली अनुकम्पा नौकरी को प्राप्त करने के लिए मनगढंत गोदनामा बनवाकर बहू से बेटी बन गई और जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत करके अनुकम्पा नौकरी प्राप्त कर ली !

कटघोरा विकास खण्ड के शासकीय प्राथमिक शाला नगोईखार में पदस्थ शिक्षिका सोनिया राठौर पर शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सचिव और आला अधिकारियों को पत्र लिखकर सोनिया राठौर को नौकरी से बर्खास्त करने और उस पर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गई है!

शिकायतकर्ता और जानकारी के अनुसार सोनिया राठौर की सास सावित्री राठौर शिक्षा विभाग में शिक्षिका के पद पर पदस्थ रही हैं जिनकी गंभीर लंबी बीमारी के कारण ईलाज के दौरान एनटीपीसी हास्पिटल कोरबा में 01 अगस्त 2011 को मृत्यु हो गई तब उसके बदले मिलने वाली अनुकम्पा नौकरी को प्राप्त करने के लिए सोनिया राठौर उसके ससुर समय लाल राठौर और पति क्रांति कुमार राठौर ने योजना बनाकर 25 मई 2011 के तारीख में गोदनामा बनवाकर सोनिया राठौर बहू से बेटी बन गई और अनुकम्पा नौकरी प्राप्त कर ली!

शिक्षिका सोनिया राठौर के द्वारा अनुकम्पा नौकरी के संबंध में जो दस्तावेज दिये गये है उससे कई सवाल खड़े होते हैं उसके 10 वीं, 12 वीं और बीएड के शैक्षणिक दस्तावेज में उसके माता पिता का नाम उसके वास्तविक माता पिता का नाम है जब की गोदनामा के अनुसार उसको बचपन से ही सावित्री राठौर और समय लाल राठौर द्वारा गोद लिया गया था तो उसके शैक्षणिक दस्तावेजों में उसके वास्तविक माता पिता का नाम क्यों? शादी कार्ड में गोदनामा के आधार पर सोनिया राठौर के दादा का नाम सही है और उसके पति क्रांति कुमार राठौर के दादा का नाम भी सही है लेकिन शादी कार्ड को देखने से कई सवाल है?सोनिया राठौर और क्रांति कुमार राठौर के जारी विवाह प्रमाण पत्र पर फर्जी होने का सवाल पैदा होता है जो जांच का विषय है?गोदनामा के अनुसार सोनिया राठौर सावित्री राठौर और समय लाल राठौर की पुत्री है और क्रांति कुमार राठौर उसका पुत्र है तो दोनों रिस्ते में भाई बहन हुए फिर भी दोनों की 12 मार्च 2012 को विवाह हो जाता है?सोनिया राठौर कोआ अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों को दरकिनार करते हुए अनुकम्पा नौकरी दी गई है?

अनुकम्पा नौकरी पाने के लिए चक्रव्यूह क्यों? जिस समय सावित्री राठौर की मृत्यु हुई उस समय उसके पति समय लाल राठौर और उसके पुत्र क्रांति कुमार राठौर शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पदस्थ थे और उसकी बहू सोनिया राठौर गृहणी थी इसलिए उसके अनुकम्पा नौकरी को प्राप्त करने के लिए तीनों ने षड्यंत्र रचते हुए विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ करते हुए मनगढंत फर्जी दस्तावेज बनवाया गया और धोखे से अनुकम्पा नौकरी प्राप्त कर लिया गया!

कानून के जानकारों की माने तो अनुकम्पा नौकरी मृतक के विधिक वारिसान और उसके परिवार के सदस्यों के वित्तीय स्थिति कमजोर होने पर दिया जाता है और गोदनामा लेने और देने के भी नियम है! जिस व्यक्ति के कोई संतान नहीं है वह व्यक्ति गोदनामा ले सकता है और गोदनामा वह व्यक्ति दे सकता है जिसके एक से अधिक संतान है और वह उसका सही ढंग से परवरिश नहीं कर सकता है!

शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू की शिकायत पर जिम्मेदार प्रशासन अगर जल्द उचित कार्यवाही नहीं करती है तो उनके द्वारा इस मामले को लेकर न्यायालय के शरण में जाने की बात कही है!

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