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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष – बढ़ता तापमान और घटता जलस्तर – हरियाली युक्त वातावरण से ही संतुलित जीवन संभव है

ग्लोबल वार्मिंग – प्राकृतिक संपदाओं का दोहन एवं प्राकृतिक असंतुलन का परिणाम है।
World Environment Day – मनुष्य के लिए हरियाली के लाभ असंख्य और महत्वपूर्ण हैं। हरियाली स्वच्छ हवा प्रदान करके, हमारे शारीरिक और मानसिक संतुलन को बढ़ाती है। पेडों से ही पर्यावरण शुद्ध और स्वच्छ होगा l

अंधाधुन पेड़-पौधों की कटाई और जिस तरह वन संपदाओं का बेरहमी से हो रहा दोहन जल समस्या एवं गिरते जल स्तर और बढ़ते तापमान का कारण है। पूर्व में लोग पर्यावरण संतुलित करने को लेकर वृक्षों को लगाते थे। लेकिन वर्तमान में उसका उलटा हो रहा है। प्रतिदिन सैकडों पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं। पहाडों को ध्वस्त किया जा रहा है प्रदुषण कम करने कोई पहल नही की जा रही l

ग्लोबल वार्मिंग प्राकृतिक संपदाओं का दोहन एवं प्राकृतिक असंतुलन का परिणाम है।

पेड़-पौधे जल स्तर को बनाए रखते है। वन संपदा के अंधाधुंध दोहन को रोक कर जल समस्या एवं गिरते जल स्तर और बढ़ते तापमान की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। हमें आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग करना चाहिए। बेवजह पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। वहीं विकास और निजी स्वार्थ के चलते प्राकृतिक संपदाओं का दोहन और सब्जी एवं खेती के लिए जंगलों को खत्म किया जा रहा है l

अगर हम प्रापर कोटा एवं आसपास की बात करें तो हमें लगातार देखन को मिल रहा है कि यह क्षेत्र गर्त की ओर पहुंच रहा रहा जिस तरह से यहां खनिज संपदाओं का अवैध और अंधाधुंन दोहन कर पहाडों को नष्ट कर दिया गया है सडकों के निर्माण और निजी स्वार्थ के चलते हजारों पेडों की काट दिये गये हैं रसूखदार इसे कोयला हब के रूप में विकसित करनें जी तोड़ मेहनत कर रहे है जिसका भयंकर परिणाम देखने को मिला है और आगे मिलता रहेगा l

बढता तापमान और घटता जलस्तर इसका अनुभव सभी नें किया है –

48 डिग्री तापमान तो महसूस कर रहे है अब आगे 50 के लिए भी तैयार रहना होगा नही तो उसकी व्यव्स्था प्राकृति की शरण में रहकर करनी होगी l

प्राकृतिक संपदाओं के दोहन पर रोक लगे अधिक से अधिक पेड़ पौधे रोपित किये जाएं वाटर हार्वेस्टिंग बनाए जाएं ताकि भविष्य की सबसे बडी़ समस्या और चुनौतीयों से कुछ हद तक बचा जा सकता है

पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजॉर्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %…

इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ायें..
बाग बगीचे बनाइये, पेड़ पौधे लगाइये, बगीचों को फालतू के खेल का मैदान मत बनाइये.. जैसे मनुष्य को हवा के साथ पानी की जरूरत है, वैसे ही पेड़ पौधों को भी हवा के साथ पानी की जरूरत है..

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