कोरबाछत्तीसगढ़

स्वेता हॉस्पिटल के विरोध में भीम आर्मी संगठन नही करेगा चक्काजाम? जिलाध्यक्ष ने DM, SP को लिखा पत्र।

कोरबा में संचालित निजी अस्पतालों द्वारा इलाज मे लापरवाही को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा था। विरोध यह था कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई है जिसमें एक महिला की जान चली गई है। मामले की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप पीड़ित परिवार के द्वारा लगाया गया था।जिसके विरोध में चक्का जाम की चेतावनी दी गई थी। जिसमें कई सारे संगठनों के लोगों की शामिल होने की खबर थी। इसी बीच खबर आ रही है भीम आर्मी भारत एकता मिशन छत्तीसगढ़ के जिला अध्यक्ष द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित पत्र के माध्यम से जानकारी दी गई किसी भी प्रकार के प्रदर्शन में भीम आर्मी भारत एकता मिशन छत्तीसगढ़ का कोई भी सदस्य एवं पदाधिकारी इस चक्कर में जाम जैसे आंदोलन में शामिल नहीं होगा।

इस मामले को लेकर भीम आर्मी भारत एकता मिशन छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अध्यक्ष दिलीप बंजारे ने बताया पीड़ित परिवार के आरोप के अनुसार महिला की इलाज के दौरान लापरवाही बढ़ती गई है जिससे उनकी मौत हुई है।

लेकिन विरोध केवल श्वेता हॉस्पिटल का ही किया जा रहा है जो गलत है श्वेता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान प्रसूता की हालत में सुधार नहीं होने की स्थिति में उनके परिजनों के द्वारा न्यू कोरबा हॉस्पिटल में महिला को भर्ती कराया गया जहां लगभग 12 से 14 घंटे तक उनका इलाज होता रहा और अंततः महिला का देहांत हो गया ऐसे में लापरवाही का ठीकरा केवल श्वेता हॉस्पिटल के ऊपर लगाना गलत है। यही कारण है विरोध एक पक्षीय प्रतीत होने की स्थिति में भीम आर्मी भारत एकता मिशन छत्तीसगढ़ द्वारा निर्णय लिया गया उसके कोई कार्यकर्ता व पदाधिकारी इस विरोध में शामिल नहीं होंगे।

लापरवाही के आरोप में सुलगते सवाल

पीड़ित परिवार के द्वारा बताया गया कि श्वेता हॉस्पिटल में लापरवाही बरती गई है जिससे प्रसूता की हालत बिगड़ती चली गई।

इस आरोप पर श्वेता हॉस्पिटल के द्वारा बताया गया उनके द्वारा किसी भी तरह का लापरवाही प्रसूता के इलाज के दौरान नहीं बरती गई है यही कारण है प्रसूता की सफल डिलीवरी पूर्व में की गई थी इसी तरह हर इलाज के लिए परिवार को लोग उनके पास आते थे।

श्वेता अस्पताल की माने तो किसी भी मरीज के इलाज मे लापरवाही नही बरती जाती क्योंकि इलाज के साथ-साथ अस्पताल की प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण होती है।

प्रसूता के इलाज को लेकर लापरवाही का आरोप केवल श्वेता हॉस्पिटल पर क्यों? पीड़ित परिवार की माने तो स्थिति खराब होने पर उसे न्यू कोरबा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां 12 से 15 घंटे तक महिला के इलाज चलता रहा वहां महिला की रिकवरी नहीं हो पाई।

सवाल तो लाजमी है आखिर में महिला को हुआ क्या था आखिर किन परिस्थितियों में उसकी जान चली गई। हालांकि महिला के मौत के बाद पीड़ित परिवार की शिकायत को लेकर संबंधित अधिकारी कार्रवाई के लिए आश्वस्त किए है। कार्रवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा चूक कहां हुई है।

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