

कोरबा। 500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली विस्तार परियोजना के छिरहुट स्थित राखड़ बांध का तटबंध काल शाम टूटने से समस्या पैदा हो गई। बांध से बड़ी मात्रा में निकली राख और जहरीला पानी आसपास के खेतों सहित रिहायशी इलाकों में पहुंच गया। आनन-फानन में ग्रामीणों को अन्यत्र शिफ्ट किया गया।
बिजली कंपनी के सामने बरसात के सीजन में फ्लाईऐश पौंड का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से पेश आई। एक दशक से भी ज्यादा समय पहले परियोजना के निर्माण के दौरान राखड़ बांध के लिए छिरहुट और आसपास के कुछ गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी।

500 मेगावाट प्लांट से बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला का उपयोग किया जा रहा है। यहां से उत्सर्जित राख का कुछ हिस्सा सीमेंट प्लांट और खाली पड़ी कोयला खदानों के लिए दिया जा रहा है जबकि बड़ी मात्रा बांध में ही सुरक्षित है। बारिश के बाद के सीजन में इसे उडऩे के लिए मौके पर स्प्रिंकलर लगाए गए हैं और पूरे हिस्से को नमीयुक्त किया गया है। बांध की सुरक्षा के लिए कई तरह की कोशिश करने के दावे सिविल मेंटेनेंस डिविजन सीएसईबी लगातार करता रहा है। उसके इन्हीं दावों की पोलपट्टी बरसात के मौसम में खुल गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जून में 108 एमएम बारिश होने के दावे हवा-हवाई हो गए। बेहद सामान्य बारिश होने पर भी सीएसईबी के राखड़ बांध का तटबंध क्या टूटा, आसपास के इलाके में तबाही आ गई। बताया गया कि अनेक
किसानों के खेतों को नुकसान पहुंचा वहीं दूसरे खतरे भी सामने आ गए। रात में ही प्रशासन की टीम यहां पहुंची। आज सुबह संसाधनों के साथ सीएसईबी प्रबंधन के ईडी सहित अन्य अधिकारी यहां पहुंचे। उनकी निगरानी में तौर पर सुधार कार्य शुरू कराया गया। प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि अगर अगले बारिश का मौसम तेज होगा तब तटबंध यदि कुछ होता है तब की हालत क्या होगी लोगों के घर तक राखड़ पहुंच जाएगी पूरा गांव मलबे में डुब सकता है इस पर सीएसईबी के कर्मचारी कुछ भी कहने से डर रहे हैं मेंटेनेंस का काम ठीक ढंग से न होने के कारण आज यह घटना हुई है