
छत्तीसगढ़ / कोरबा
कोरबा के हाईप्रोफाइल DMF घोटाला में भ्रष्टाचार करने और रिश्वत लेने के लिए नियमों में ही बदलाव कर डाले ईडी के द्वारा इस मामले में चालान पेश किया गया है जिसके अनुसार तत्कालीन कलेक्टर को 40% सीईओ को 5% और एसडीओ को 3% सब इंजीनियर को दो परसेंट कमीशन का खुला खेल खेला गया और आम जनता के हक पर तत्कालीन कलेक्टर के साथ-साथ घोटाले में लिप्त सभी संबंधित कर्मचारीयों और अधिकारीयों ने मिलकर जमकर बंदर बांट किया गया।
आपको बता दे DMF के 575 करोड़ के काम देने के लिए व्यापारियों (वेड़रों) से रिश्वत लिया गया और रिश्वत की रकम ऊपरी शासन प्रशासन के कई प्रभावशाली लोगों तक पहुंची।
तत्कालीन कोरबा कलेक्टर रानू साहू और सहायक आयुक्त ट्रायबल विभाग के माया वारियर डीएमएफ घोटाले में जमकर रिश्वत का खेला करते हुए करोड़ों रुपए डकार गए और माया मैडम यही नहीं अपनी माया से रिश्वत में इनोवा वाहन भी ले लिए।
कोरबा कलेक्टर में पदस्थ बाबूसाहब की भूमिका….
रिश्वत के इस खेला में मध्यस्थता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका माया वारियर के विश्वास पात्र करीबी बाबूसाहब अमन कुमार राम का भी नाम सामने आया है जो व्यपारियों और अधिकारियों के मध्य रिश्वत की रकम का मध्यस्थ कर लेनदेन करने का काम करता था।
DMF घोटाला उजागर होने और मामले में दोषीयों की गिरफ्तारी की गई ईडी के द्वारा चालान पेश किया गया है जिसमें मध्यस्थता कर रकम की लेनदेन करने अहम भूमिका में अमन कुमार राम का नाम सामने आया है फिर भी अमन कुमार राम वर्तमान में भी उसी स्थान पर पदस्थ है जिस स्थान पर रहकर उन्होंने भ्रष्टाचार के परिभाषा को बखूबी परिभाषित की थी।
अभी भी जिस कार्य स्थल पर उनके ऊपर डीएमएफ घोटाले में नाम आया है वहाँ उनके पैर अंगद के तरह जमा हुआ है उस स्थल से आज तक टस से मस नहीं हुए और हुआ भी होगा तो उसे रोक लिया गया! कहीं ऐसा तो नहीं की घोटाले में संलिप्त रखने वालों के संरक्षण में जांच के दौरान जांच टीम की विफलता के लिए अमन कुमार राम अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने की कोशिश में लगा हो?
इस मामले की शिकायत पूर्व में छत्तीसगढ़ शासन आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर में की जा चुकी है। शिकायत में माया वारियर तत्कालीन सहायक आयुक्त अमन कुमार राम सहायक ग्रेड 3, कुश कुमार देवांगन डाटा एंट्री ऑपरेटर के नाम को शामिल किया गया था,बावजूद इस कार्य स्थल पर अमन कुमार राम कार्यरत है जिसके कारण संदेहास्पद प्रतीत होना लाजमी है।
सूत्रों की माने तो अमन कुमार राम भारत सरकार जनजाति कार्य मंत्रालय नई दिल्ली के पत्र अनुसार संविधान के अनुच्छेद 275 (1) परियोजना केंद्रीय मद् अंतर्गत 600 लाख के कार्य में भी (PFMS) DMF की तरह मध्यस्थता कराने के लिए शिकायत हुई हैं जिसमें वर्तमान आज तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है जिसमें भ्रष्टाचार करके भारी भरकम रिश्वत की रकम कमा लिए हैं? सोचने वाली बात है की प्रदेश के चर्चित इतने बड़े डीएमएफ घोटाला में नाम आने के बावजूद भी वह उसी स्थान पर कार्यरत है आखिर क्या कारण है कि घोटाले में संलिप्तता स्पष्ट होने के बाद भी उसे अन्यत्र पदस्थ नहीं किया जा रहा है?