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जनसूचना अधिकारी आरटीआई का उड़ रहे माखौल.. कैसे खुलेगी पोल

कोटा जनपद के अंतर्गत आने वाली कुछ पंचायते नही मानती सूचना के अधिकार कानून को

@kuldeep Sharma कोटा – सूचना के अधिकार कानून की किस तरह से धज्जियां उडाई जा रही है ये कोटा जनपद पंचायत के विभिन्न ग्राम पंचायतों में देखा जा सकता है इस कानून को पंचायतों के सरपंच सचिव मजाक बना रखे है जानकारी देना ही नही चाहते और जमकर भ्रष्टाचार में लगे हुए है l जनसूचना अधिकारी आरटीआई का उड़ा रहे माखौल… कैसे खुलेगी पोल l
कोटा एक आरटीआई कार्यकर्ता नें कुछ ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने सूचने के अधिकार 2005 के तहत जानकारी के लिए आवेदन भेजा था जिसका जवाब सचिव जनसूचना अधिकारी नें मनमानी करते हुए तीन माह बाद भी जानकारी उपल्बध नही कराई जोकि अब आवेदक द्वारा अपिल में आवेदन की कापी भेजी जाएगी l
जहां लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शासन के द्वारा निरंतर पहल किया जाता है वही जन सूचना अधिकारी द्वारा इसका पालन नहीं कर जानकारी देने से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढे जाते हैं इस तरह का मामला जनपद पंचायत कोटा में देखने को मिला जन सूचना अधिकारी से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत
जानकारी मांगी गई 18/10/2023 को जिसका आज तक कोई भी जवाब नहीं दिया गया कार्यालय प्रथम अपील अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोटा जिला बिलासपुर को 5/10/2023 अपील आवेदन प्रस्तुत किया गया था उभय पक्षों की सुनवाई दिनांक 18/10/ 2023 को आहूत किया गया था उक्त सुनवाई में जन सूचना अधिकारी उपस्थित एवं अपीलार्थी उपस्थित रहे अपीलार्थी द्वारा बताया कि जन सूचना अधिकारी के द्वारा ना ही किसी प्रकार का पत्राचार किया जा रहा है। ना ही जानकारी दिया जाना बताया जा रहा है। जो सूचना अधिकार का घोर उल्लंघन किया गया है । जन सूचना अधिकारी को एक आदेश पत्र जारी किया गया आज दिनांक तक उनके द्वारा कोई भी जानकारी नहीं दी गई जानकारी नहीं देने वाले ग्राम पंचायत का नाम ग्राम पंचायत सोनपुरी, ग्राम पंचायत पौड़ी, ग्राम पंचायत मिट्ठूनवागांव ,ग्राम पंचायत कलारतराई, ग्राम पंचायत जोगीपुर ,ग्राम पंचायत बेलगहना, ग्राम पंचायत कुरदर ग्राम पंचायत बारीडीह, ,ग्राम पंचायत आमामुडा, ग्राम पंचायत बनाबेल, उक्त ग्राम पंचायत द्वारा कितना भ्रष्टाचार किया गया है। और किस कारण से जानकारी देने से बच रहे हैं ग्राम पंचायत के सचिव उनको किसी का डर नहीं क्योंकि वह जानते हैं कि आज तक उनके ऊपर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई सिर्फ खानापूर्ति करके छोड़ दिया जाता है! ग्राम पंचायत के सचिव आडिट करने से भी बचते हैं।

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